किसान कृषि बिल 2020 | Agriculture Farm Bill 2020 PDF | Farmers Bill 2020 PDF

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हाल ही में सितम्बर माह के अंत में भारत सरकार ने तीन किसान बिल 2020 को सदन में पास करके कानून में तब्दील किया है। इन तीन kisan-bill-2020 के बारे में विस्तार से जानिए।

मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम (Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Act), और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम पर किसानों का उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम (Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Act), किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता(the Essential Commodities (Amendment) Act)।

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किसान बिल 2020 (Agriculture Bill 2020) को प्रधान मंत्री ने लिया वापिस

किसान बिल 2020 ( Agriculture Bill 2020 ) किसान बिल जो 2020 में भारत की संसद में पास हुआ था और जिस बिल के विरोध में किसान लगभग 9 महीनो से हड़ताल पर बैठे थे आज दिन 19 नवंबर 2021 को भारत  के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इन तीनो कृषि बिलो को वापिस लेने का ऐलान कर दिया है।  प्रधान मंत्री जी ने ये कहा है की आने वाले संसद सत्र में इन तीनो कृषि बिलो को कानूनी तरिके से रिपील कर दिया जायेगा। 

ये तीन किसान कृषि बिल 2020 [farmers bill 2020 pdf hindi] मोदी सरकार द्वारा  सितंबर 2020 के अंत में, कानून के रूप में अनुमोदित और अधिसूचित किया गया और राष्ट्रपति की स्वीकृति से इन तीनो बिलो को  कानूनों में बदल दिया।

Agriculture-kisan-bill-2020

Farmers ‘Production Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Act, Farmers’ (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Agricultural Services Act, and Essential Commodities (Amendment) Act.

All three of these bills were approved and notified by the Modi government in late September 2020 as laws, and with the approval of the President, these three bills were converted into laws.

क्या है तीनों कृषि बिल kisan-bill-2020

भारत सरकार ने सितम्बर 2020  के अंत में जो किसानो के लिए तीन बिलो को कानून के रूप में तब्दील किया है, उन तीन विधेयकों का मतलब क्या है ? चलिए एक एक करके इन तीन kisan-bill-2020 के बारे में बात करते हैं और एक लिंक देते है जहाँ से आप किसान बिल 2020 पीडीएफ डाउनलोड/ farmers bill 2020 pdf download कर सकें।

किसान की उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020

इस अधिनियम के तहत किसानो के लिए खुली मंडी का प्रावधान किया गया है जिससे किसान अब अपनी फसलों को देश के किसी भी डिस्ट्रिक्ट या फिर किसी भी स्टेट में बेच सकते हैं। इस अधिनियम के तहत किसान अपनी फसल APMC से बहार बेच सकता है और सीधे बाजार से सम्बन्ध स्थातिपित कर सकता है।

मूल्य आश्वासन और फार्म सेवा विधेयक, 2020 का किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता

इस विधेयक को किसानो के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए बनाया गया है।  इस विधेयक के तहत किसान अपनी फसल बिजने से पहले कृषि व्यवसाय फर्मों के साथ, थोक विक्रेताओं के साथ, निर्यातकों या बड़े खुदरा विक्रेताओं के साथ, अपनी फसल का कॉन्ट्रैक्ट कर सकते है और फसल बिजने से पहले ही अपनी फसल का भाव सुनिचित कर सकते हैं।

आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020

इस अधिनियम के तहत एसेंसिअल कमोडिटीज (आवश्यक वस्तुओं ) जैसे की अनाज, दाल, तिलहन, प्याज और आलू जैसी आवश्यक खाद्यान वस्तुओं को इस आवश्यक सूची से बहार निकाल दिया गया है और इनके भण्डारण की सीमाओं (कुछ परिस्थितियों को छोड़कर ) से प्रतिबंध हटा दिया गया है।

Kisan Bill 2020 पर किसानो की शंकाएँ तथा सरकार द्वारा दिया जाने वाला आश्वासन।

किसानो की शंकाएं

सरकार द्वारा दिया जानेवाला आश्वासन

धीरे धीरे सरकार MSP (मिनिमम सपोर्ट प्राइस ) को ख़त्म कर देगी।

MSP के साथ कोई छेड़खानी नहीं होगी।  MSP पहले की तरह ही चलता रहेगा। 

निजी मंडिया खुलने से APMC ख़त्म हो जाएँगी और APMC ख़त्म हो जाएगी तो MSP भी ख़त्म हो जायेगा।

किसान के पास अब दो रस्ते होंगे, चाहे तो वह APMC में या फिर निजी मंडी में अपनी फसल बेच सकता है।  और MSP ऐसे ही जारी रहेगा।

खेती में निजी निवेश होने से निजी कंपनियां किसानो के साथ मनमानी करेंगी। 

कोई भी निजी कंपनी मनमानी नहीं करेगी।  सब कुछ कॉन्ट्रैक्ट के तहत ही होगा।

निजी कम्पनिया छोटे किसानो से उनकी जमीने कब्जा लेंगी। 

कॉन्ट्रैक्ट के तहत केवल फसल का कॉन्ट्रैक्ट होगा उसमे जमीन का कोई जिक्र नहीं होगा। 

निजी कंपनियां अगर वही फसल कहीं और से कम दाम पर मिलती होगी तो वो किसान के साथ धोखा कर सकती है और उसकी फसल खरीदने से  आना कानि कर सकती है। 

इस दौरान किसान SDM कोर्ट में जा सकता है और कोर्ट में किसान के पक्ष को प्रमुखता दी जाएगी।

किसान को SDM लेवल की न्याय प्रणाली पर शंक है उसको लगता है की बड़ी कंपनियां अपनी  ताकत के बलबूते SDM को प्रभावित कर सकती हैं और फैसला अपने पक्ष में करा सकती हैं।

सरकार इस तरह के केस को सिविल कोर्ट तक ले जाने का प्रावधान करने को तैयार है।

छोटे किसानो के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग संभव नहीं है।

अगर किसान अपनी कृषि प्रणाली में बदलाव नहीं करेंगे तो उनकी आय कैसे बढ़ेगी।

बड़ी कंपनियों के पास भण्डारण की स्वतंत्रता होगी और इसके तहत वो अपनी मनमानी करेंगे और जिससे किसानो की फसलों के दाम गिर सकते हैं। 

किसान अपनी फसल बेचने के लिए स्वतंत्र होगा वह वहीँ पर बेच सकता है जहाँ पर उसको दाम अधिक मिलेगा। 

किसान बिल फसलों के न्यूनतम समर्थन  मूल्य न देने की साजिस है।

किसान बिलो का न्यूनतम समर्थन  मूल्य से कोई लेना देना है , वह ज्यों का त्यों जारी रहेगा। 

बड़ी कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट के द्वारा किसानो का शोषण करेंगी।

कंपनियों द्वारा पहले से तय दाम ही किसान को मिलेंगे और किसान इस समझौते से कभी भी पीछे हटने के लिए स्वतंत्र है। 

किसान विधेयक से बड़ी कंपनियों को फायदा होगा और किसान को नुकसान होगा।

नए विधयेक से किसानो को नुकसान की बजाय फायदा होगा , अब वह बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर महंगी फसलों का भी उत्पादन कर पायेगा। 

Krishi Bill 2020 सरकार द्वारा गिनाये जाने वाले उद्देश्य

1      सरकार इन बिलो को द्वारा  छोटे और सीमांत किसानो की मदद करना चाहती है।

2      ऐसे किसान जो अपनी फसल की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए निवेश नहीं कर सकते हैं उनको इन 3    kisan-bill-2020 के तहत उनकी कृषि में निवेश की उम्मीद बढ़ जाती है।

3      यह बिल किसानो को अपनी फसल मार्किट मंडियों  के बहार भी बेचने की अनुमति देता है।

4      इन बिलो के तहत व्यापारी किसान की फसल सीधे ही किसान के खेत से भी खरीद सकता है।

5      किसान को कमीशन एजेंट और मंडी शुल्क से छुटकारा मिल सकता है।

6      किसान अपनी फसल को देश के किसी भी कोने में बेच सकता है।

7      किसान सीधे बाजार के साथ अपनी बातचीत आगे बड़ा सकता है।

8      किसान की फसल को अवरोध मुक्त अंतर् – राज्य व्यापार को बढ़ावा देना।  

9      किसान अपनी फसल उगाने से पहले  ही उसका पूर्व- सहमत मूल्य जान सकता है।

10     किसान अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलिया सिस्टम को समाप्त करके सीधा व्यापारियों से जुड़ सकता है।

11     एक प्रतिस्पर्धी बाजार का माहौल बनाना और कृषि उपज का अपव्यय में कटौती करना

सरकार द्वारा गिनाये जाने वाले Kisan Bill 2020 के फायदे

  • किसान अनुबंध विधेयक 2020 (Farmers Bill 2020) के द्वारा किसान बिचौलिया प्रणाली यानि आढ़तिया प्रणाली से बच सकता है।
  • छोटे किसान जो महंगी खेती नहीं ऊगा सकते, इस विधेयक के तहत प्राइवेट कंपनियों से कॉन्ट्रैक्ट कर सकते है और अपनी फसल के लिए निवेश जुटा सकते हैं।
  • किसान भाविष्य में मिलने वाले अपनी फसल के मूल्य जैसी शंकाओ  को दूर कर सकता है और फसल उगाने से पहले ही फसल का सहमति मूल्य जान सकता है।
  • किसान अपने क्षेत्र के आलावा देश के किसी भाग में अपनी फसल को बेच सकता है जहाँ पर उसको फसल के दाम अधिक मिल रहे होंगे।
  • किसान मंडी में लगने वाले शुल्क से बच सकता है।
  • किसान के पास अपनी फसल को बेचने के दोनों रस्ते होंगे वो चाहे तो APMC मंडी में या फिर डायरेक्ट व्यापारी को भी बेच सकता है।
  • बड़ी निजी कंपनियों, निर्यातकों, थोक विक्रेताओं के बाजार में आ जाने से पर्तिस्पर्धा बढ़ेगी और पर्तिस्पर्धा बढ़ने से किसान को ज्यादा मुनाफा मिलेगा। 
  • मूल्य स्थिरता आने से किसानो तथा उपभोक्ताओ दोनों को मदद मिलेगी।
  • इन बिलो से कृषि क्षेत्र में निजी निवेश या FDI को बढ़ावा मिलेगा।
  • ये बिल किसानो के लिए नए विकल्प उपलब्ध कराएंगे।
  • किसान की उपज बेचने पर लगने वाली लगत को कम कराएंगे।   

 तीन नए कृषि बिल (Kisan Bill 2020) क्या हैं? व क्यों कर रहे हैं किसान आंदोलन?

सितम्बर 2020 के अंत में सरकार द्वारा तीन कृषि बिलो का  कानून के रूप दिया गया है।  सरकार का मानना है की ये kisan-bill-2020 किसानो की आय बढ़ाने  में कारगर साबित होंगे।  भाजपा सरकार जब दूसरी बार सत्ता में आई थी तो 2022 तक किसानो की आय दोगुनी करने का उनका चुनावी नारा था।  और ये kisan-bill-2020 भी इस चुनावी नारे को साकार करने के लिए एक पहल है।इसके आलावा भी सरकार PM किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं ले कर आई।

जैसे की इन तीनो बिलो के बारे में ऊपर  हम अपने लेख में बता चुके हैं, फिर भी मोटा मोटा  इन बिलो के बारे में बताते हैं।

सरकार ने किसानो के लिए APMC (Agriculture Product Market Committee) के साथ साथ एक सामानांतर मंडी खड़ी करने का प्रावधान किया है।

किसानो के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के दरवाजे खोले हैं।

निजी कंपनियों को कुछ (हालत को  छोड़कर) जरूरो खाद्य पदार्थो के भण्डारण से रोक हटा ली है।

कुछ किसानो और किसान यूनियनों को लगता है की ये किसान बिल किसानो के हित  में नहीं है।  सबसे पहले पंजाब राज्य से इन किसान बिलो का विरोध शुरू हुआ था और धीरे धीरे ये विरोध जोर पकड़ता गया। 

पंजाब राज्य में इन बिलो के विरोध में धरने और प्रदर्शन निकाले  गए और धीरे धीरे इन बिलो का विरोध करने वाले लोगो की तादात बढ़ती गई।

सबसे पहले पंजाब से किसानो ने इन बिलो का विरोध प्रदर्शन करने के लिए पंजाब से दिल्ली की तरफ कूच  किया , रास्ते  में हरियाणा सरकार ने इन्हे मानाने या फिर रोकने की पुरजोर कोशिश की लेकिन किसानो ने किसी की नहीं सुनी और दिल्ली की तरफ कूच जारी रहा।  इस बीच हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान भी इस आंदोलन में शामिल होते गए।

धीरे धीरे अन्य राज्य के किसान भी इस आंदोलन में शामिल होते गए लेकिन यह आंदोलन अभी तक शांतिप्रिय रहा है।  इतना बड़ा आंदोलन होने के साथ साथ इस आंदोलन में अभी तक किसी  भी अप्रिय घटना की खबर नहीं आई आई है।

इस बीच सरकार ने भी इस आंदोलन को खत्म करवाने का प्रयास किया है।  कई दौर की बातचीत किसानो और सरकार के बीच में हुई है लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है।

सरकार ने इन तीनो कृषि बिलो में शंशोदन करने की भी पेशकस की है लेकिन आन्दोलनकर्ता किसानो की मांग केवल इन तीनो कृषि बिलो को रद्द करने की और MSMP को गारंटी एक नया कानून बनाने की रही है।

Kisan-bill-2020 का विरोध करने वाली किसान यूनियन और राजनैतिक दाल

किसान बिल के विरोध में किसान यूनियनों के साथ साथ लगभग सभी विपक्षी पार्टियां भी इस आंदोलन में कूद पड़ी है।

जब से किसानो ने इस आंदोलन को तीव्रता दी है तब से किसान आंदोलनकारियों और भारत सरकार के बीच लगभग 6 दौर की वार्तालाप हो चुकी है लेकिन अभी तक इसका कोई नतीजा नहीं निकला है।

इस आंदोलन में विभिन किसान यूनियनों ने भाग लिया है जिनमें से कुछ इस प्रकार है।

किसान मजदूर संघर्ष समिति

भारती किसान यूनियन-एकता उग्रहा

भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी

भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल

क्रांतिकारी किसान यूनियन

भारतीय किसान यूनियन डकोंजा

भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर

भारतीय किसान यूनियन राजेवाल

भारतीय किसान यूनियन कादियान

कीर्ति किसान यूनियन

भारतीय किसान यूनियन दोआब

किसान संघर्ष समिति

जम्हूरी किसान सभा

भारतीय किसान यूनियन मन

ऑल इंडिया किसान सभा पंजाब

पंजाब किसान यूनियन

भारतीय किसान यूनियन मान

भारतीय किसान यूनियन गुरनाम

आजाद किसान संघर्ष कमेटी

राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ

भारतीय राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन

भारतीय किसान यूनियन अंबावत

राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ

भारतीय राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन

ऑल इंडिया जाट महासभा

इन सभी किसान यूनियनों के साथ साथ कुछ राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनितिक पार्टियां भी इस आंदोलन में कूद पड़ी है जिनमे से कांग्रेस, आम आदमी , समाजवादी पार्टी, अकाली दाल और तृणमूल कांग्रेस जैसे दल है। इस आंदोलन में किसानो के साथ साथ APMC (Agriculture Product Market Committee) के कमीशन एजेंट भी हैं क्योंकि इन तीनो बिलो के आने से APMC के कमीशन एजेंटो की आमदनी पर फर्क पड़ने वाला है।

किसान आंदोलन से संबंद्धित-kisan-bill-2020 [नया अपडेट]

Agriculture bill 2020 or kisan bill 2020 को निरस्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी किसान बुधवार को अड़े रहे। दिल्ली की शिमाओ  पर हजारों किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें टिकरी, सिंघू और गाजीपुर  बॉर्डर शामिल हैं। केंद्र ने बुधवार को प्रदर्शनकारियों को एक प्रस्ताव भेजा था , हालांकि, किसान निकायों ने दस्तावेज को अस्वीकार कर दिया और कहा कि वे कानून की वापस लेने की मांग पर दृढ़ हैं । संगठनों ने 12 दिसंबर को दिल्ली जयपुर राजमार्क बंध करने की धमकी दी है ।

किसान इन नए निर्मित तीन kisan-bill-2020 को वापिस लेने के साथ साथ चाहते हैं कि सरकार बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 को भी वापस ले और न्यूनतम समर्थन मूल्य को गारंटी करने के लिए भी सरकार एक नया कानून बनाये और इसके आलावा पराली जलाने से सम्बंधित विधेयक को भी वापिस ले।

Kisan Andolan New Update

किसानो और सरकार के बीच चल रहे गतिरोध के बीच, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘किसान कल्याण सम्मेलन’ में मध्य प्रदेश के किसानों को संबोधित किया, जिसे देश के लगभग 23,000 गांवों और मध्य प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रसारित किया गया था।
लगभग 55 मिनट संबोधन के दौरान, प्रधान मंत्री मोदी ने किसानों के कल्याण के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया और बताया कि कैसे तीन कृषि कानून किसानों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम हैं।
भाषण ख़तम करने से पहले प्रधान मंत्री श्री नरेंदर मोदी ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्ता दोहराई की किसानो का कल्याण करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है
अपने भाषण के समापन के दौरान, पीएम मोदी ने कहा कि किसानों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। “लेकिन इन सब के बाद भी, अगर हमारे किसानों को कोई चिंता है, तो हम उनके सामने अपना सिर झुकाएंगे और उनकी बातों को सुनेंगे। उनका लाभ हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, ”अपना सम्भोदन ख़त्म करने से पहले उन्होंने ये बाते दोहराई।

मोदी द्वारा मध्यप्रदेश के किसानो को सम्बोधित करने के बाद अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के एक प्रतिक्रिया बयान में कहा गया की, “तीन कृषि अधिनियमों जो की किसानो की भूमि और खेती के विरुद्ध है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बड़े व्यवसाय को बढ़ावा देते हैं उन्हें निरस्त करने के की बजाय प्रधानमंत्री ने यह दावा करते हुए भारत के किसानों पर एक खुला हमला किया कि वे विपक्षी दलों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने एक जिम्मेदार नेता के रूप में अपनी भूमिका को कम करते हुए खुद को एक पार्टी नेता के रूप में कम कर लिया है।”

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